क्या राजीव गांधी भ्रष्टाचारी नम्बर 1 थे?

नेहरू का जमाना:

नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी के पास अमीर उद्योगपतियों के दान से आय का एक स्पष्ट स्रोत था जो एक बंद अर्थव्यवस्था द्वारा भी बहुत लाभान्वित हुआ था अतः कृतग्य भी था। याद करे लगभग 40 वर्षों तक 1984 तक अम्बेसडर कार को बढ़ावा दिया गया था। अब कोई मॉडल 4 साल नही चलता।

इंदिरा ने राष्ट्रीयकरण शुरू किया और उद्योगपतियों ने कदम पीछे खींच लिए। उसने 97% आयकर लगाकर जवाबी कार्रवाई की। संपूर्ण अर्थव्यवस्था काली / भूमिगत हो गई। उसने रक्षा सौदों में पैसा लेना शुरू कर दिया। वी.पी. सिंह ने इसी गोलमाल को जर्मन HDW पनडुब्बी सौदों में ढूंढ लिया।

किसी भी मामले में, 1990 से पहले, यानी T.N.Seshan के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के पहले, चुनावों में भारी हेरफेर किया गया। कांग्रेस हमेशा 1977 को छोड़कर ,जीती थी जब इंदिरा के खिलाफ भी कर्मचारी भी हो गए थे।

इन सभी चुनावों में पैसा खर्च होता है। तो यह कैसे किया?

देखिये:

स्विटज़रलैंड की सबसे लोकप्रिय पत्रिका, स्कवीज़र इलस्ट्रेटर, [दिनांक ११ नवंबर, १९९१] ने विकासशील राष्ट्रों के १४ राजनेताओं का पर्दाफाश किया, जिन्होंने कहा, स्विस बैंकों में उनके रिश्वत का पैसा लगा था। जर्मन में एक्सपोज़ का शीर्षक “फ्लुच्गेल्डर – डाई श्वाइज़र कोंटन डर डिक्टेटरन” पढ़ा। अंग्रेजी में इसका अर्थ था:

“धन का अभिशाप – तानाशाहों का स्विस बैंक खाता”

राजीव गांधी गुप्त खातों में निधियों के साथ एक के रूप में उजागर हुए। Schweizer Illustrierte कोई छोटी मोटी पत्रिका नहीं है। यह नंबर वन स्विस पत्रिका है और कुछ 2,10,000 प्रतियां बेचती है। इसकी पाठक संख्या 9,18,000 है – स्विस वयस्कों में से कुछ 15 प्रतिशत। पत्रिका ने अलग-अलग नेताओं के गुप्त स्विस खातों में उनके चित्रों के साथ विशिष्ट मात्रा का उल्लेख किया था।

अंग्रेजी में अनुवादित राजीव गांधी की तस्वीर के नीचे की रिपोर्ट, पढ़ें: “राजीव गांधी, भारतीय” में “स्विट्जरलैंड में भारतीय गुप्त खातों पर 2.5 बिलियन फ़्रैंक“।

आज 2.5 बिलियन स्विस फ़्रैंक की राशि 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर के बराबर है। लेकिन जब तक राजीव नहीं थे, तब तक यह परिवार की विरासत बन गया।

पत्रिका द्वारा पकड़े गए अन्य नेता थे: इंडोनेशिया के सुहार्तो (25.5 बिलियन), इथियोपिया के हैले सेलासी (22.5 बिलियन), ज़ायरे का मोबुतु (6 बिलियन), ईरान के शाह पहलवी (5.7 बिलियन), इराक के सद्दाम हुसैन (800 मिलियन) ), और रोमानिया के निकोलस सेयूसेस्कु (500 मिलियन)। उल्लिखित स्लश मनी के आंकड़े स्विस फ़्रैंक्स की मिलियार्डन (अर्थ ’बिलियन’) इकाइयों में थे। अगर राजीव जीवित होते, तो भारत में राजनीतिक सूनामी फैल जाती।

गांधी परिवार ने इस पत्रिका पर कभी कोई मान हानि का मुकदमा नही किया।

रूस से घूस:

1992 में, भारतीय समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिंदू ने रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें आरोप लगाया गया था कि राजीव गांधी ने रूसी गुप्तचर विभाग यानी केजीबी से धन प्राप्त किया था। रूसी सरकार ने इस खुलासे की पुष्टि की और सोवियत वैचारिक हित के लिए आवश्यक रूप से भुगतान का बचाव किया।

अपनी 1994 की पुस्तक द स्टेट विद ए स्टेट में, पत्रकारों येवगेनिया अल्बेट्स और कैथरीन फिट्ज़पैट्रिक ने 1980 के दशक में केजीबी के प्रमुख, विक्टर चेब्रिकोव द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र उद्धृत किया था। पत्र में कहा गया है कि केजीबी ने गांधी के साथ संपर्क बनाए रखा, जिन्होंने एक नियंत्रित फर्म के वाणिज्यिक लेनदेन से अपने परिवार को होने वाले लाभों के लिए केजीबी के लिए आभार व्यक्त किया। इस चैनल से प्राप्त धन का एक बड़ा हिस्सा उनकी पार्टी को समर्थन देने के लिए इस्तेमाल किया गया था।

बाद में अलबेट्स ने कहा कि दिसंबर 1985 में, चेब्रीकोव ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित राजीव गांधी के परिवार के सदस्यों को भुगतान करने के लिए सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति से प्राधिकरण मांगा था। भुगतान को एक संकल्प द्वारा अधिकृत किया गया था और यूएसएसआर मंत्रिपरिषद द्वारा समर्थन किया गया था, और 1971 से लगातार यह भुगतान किया गया था।

अब राजीव गांधी भ्रष्टाचारी थे कि नही, इसका फैसला आप खुद कर ले।
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