कॅरोना की मौत की वर्षा का सच क्या है?

इससे भी अधिक चौंकाने वाला एक अन्य तथ्य यह भी है कि भाजपा शासित कुल 17 राज्यों तथा केंद्र शासित 7 राज्यों (UT) में कोरोना के कारण आज सवेरे 8 बजे तक हुई कुल मौतों की संख्या 57820 थी। यह संख्या देश में कोरोना के कारण हुई कुल 208330 मौतों का मात्र 27.75 प्रतिशत है।

कांग्रेस क्या कर रही है?

उपरोक्त स्थितियां कांग्रेस तथा कांग्रेस गठबंधन एवं केजरीवाल शासित 6 राज्यों की सरकारों की नीति एवं नीयत को गम्भीर सवालों और संदेहों के कठघरे में कर देती हैं। हम सब देख चुके हैं कि कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कोरोना वैक्सीन को लेकर किस तरह देश में लगातार भय और भ्रम फैला कर लोगों को वैक्सीन लगवाने से रोका। इतने संगीन हालातों में महाराष्ट्र की सरकार ने वैक्सीन की 5.5 लाख डोज बरबाद कर देने का सच स्वयं स्वीकार किया।

कल ही अदालत में यह शर्मनाक खतरनाक सच उजागर हुआ कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की 52000 डोज को केजरीवाल सरकार छुपाये रही और अपने पास केवल 2500 इंजेक्शन होने की बात करती रही। लेकिन अदालत में सच सामने आ गया। कल ही यह भी सच उजागर हुआ कि ऑक्सीजन की एक एक बूंद के लिए तरस रही दिल्ली में रोजाना 500 सिलेंडर ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली फैक्ट्री को केजरी सरकार ने 20 अप्रैल को ही बिना किसी कारण के ही बंद करा दिया। अदालत में यह भी सच उजागर हुआ कि केजरी की सरकार ने ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कम्पनी को अस्पतालों की पूरी और सही सूची ही कल तक नहीं सौंपी थी।

उपरोक्त सारी करतूतों का एक ही भयंकर परिणाम निकला और उपरोक्त 6 राज्यों में कोरोना का कहर दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ता चला गया। इन सरकारों ने ऐसा क्यों किया.? अब इसे भी समझिये….

देश में कोरोना महामारी का कहर बेलगाम बेकाबू होता जा रहा है। उसकी विकरालता लगातार बढ़ती जा रही है। कोरोना के कहर पर नियंत्रण का हर प्रयास फिलहाल असफल हो रहा है। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में कांग्रेस के सर्वाधिक महत्वपूर्ण नेताओं में से एक तथा राजीव गांधी के समय से गांधी परिवार विशेषकर सोनिया गांधी के सर्वाधिक करीबी एवं विश्वसनीय पी. चिदम्बरम ने दो दिन पूर्व खुलेआम यह आह्वान कर दिया कि देश के लोग सड़कों पर उतर कर विद्रोह कर दें। आम आदमी की भाषा में चिदम्बरम के इस आह्वान का सीधा सा अर्थ यही है कि लोग सड़कों पर उतर कर दंगा करना शुरू कर दें।

कल्पना करिए कि जब देश के हालात इतने नाजुक हों कि ऑक्सीजन और दवाओं की आपूर्ति के लिये सरकार को भारतीय वायुसेना के युद्धक हेलीकॉप्टर और जहाज तैनात करने पड़ गए हों, तब ऐसे गम्भीर हालात में देश का गृहमंत्री, रक्षामंत्री, वित्तमंत्री रह चुका व्यक्ति जब देश के लोगों को सड़कों पर उतर कर दंगा करने के लिए खुलेआम भड़काता उकसाता है तो उसके राक्षसी इरादे बहुत साफ दिखाई देने लगते हैं।

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और उसकी बहन प्रियंका वाड्रा की जोड़ी भी पिछले कई दिनों से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जहरीले उकसाऊ भड़काऊ बयानों और आरोपों की मूसलाधार बरसात लगातार कर रही है। पी चिदम्बरम खुलेआम देश के लोगों से अपील कर रहा है कि सड़कों पर उतर कर विद्रोह कर दो। इन स्थितियों को देखकर
कल वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने ट्वीट कर के लिखा कि…

“अभी मेरी बात को ज़्यादातर लोग राजनीति प्रेरित कहेंगे, लेकिन सच यही है कि @narendramodi को घुटनों पर लाना है, असफल साबित करना है, इस एक प्रवृत्ति ने इस बार के हालात बिगाड़े हैं। गैर भाजपा शासित राज्यों ने बेहद लापरवाह रवैया अपनाया है। ठीकरा फोड़ने के लिए मोदी है, वाले अंदाज में। स्थिर होकर सोचिए, सच यही है।”

हर्षवर्धन त्रिपाठी की ही भांति कई लोगों ने कल यही बात अपने अपने तरीके से कही। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हमने इस खतरनाक साज़िश को समझने में बड़ी देर कर दी है। पिछले एक साल से ये स्पष्ट दिखाई रहा है क कि यह एक सोची-समझी साजिश है जिसका एकमात्र ज़हरीला एजेंडा किसी भी क़ीमत पर इस देश की सत्ता से इस राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री और उसकी सरकार को उखाड़ कर फेंका जा सके। राहुल गांधी तो इसकी अपील अमरीकी राजनयिक से एक वीडियो में पहले ही कर चुके है।

अब आप विचार करे कि यह क्या हो रहा है?

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