इंदौर में डॉक्टर के घरवालों का खून राशिद नाम के मरीज ने किया।

(तिथि मंगलवार 04 जून, 2019)

इन्दौर के मालवा मिल इलाके में त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ रामकृष्ण वर्मा के घर में ही स्थित क्लिनिक पर मोहम्मद रफीक राशिद अपना इलाज कराने आया।

डॉक्टर किसी काम से इन्दौर के बाहर गये हुये थे तो उनकी पत्नी श्रीमती लता वर्मा (जो क्लिनिक में अपने पति की सहायक भी थीं) ने रफीक को 2 दिन बाद आने को कहा। रफीक श्रीमती लता से ही दवा देने के लिये कहने लगा जिसपर श्रीमती लता ने इन्कार करते हुये कहा कि वो डॉक्टर नहीं हैं और बिना जांच इत्यादी के दवा नहीं दे सकती। रफीक जिद पर अड़ गया और बहस करने लगा।

बहस करते करते अचानक से रफीक ने अपने कुर्ते की ज़ेब में हाथ डाला और एक मांस काटने वाला चाकू निकाल के श्रीमती लता वर्मा पर ताबड़तोड़ वार करने लगा। उनकी चीखें सुन के उनका बेटा अभिषेक अपनी माँ को बचाने आया तो उस पर भी हमला कर दिया।

श्रीमती लता ने मौके पर ही दम तोड़ दिया और अभिषेक गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।

यह क्या मसला है? क्या यह भी किसी तरह का जिहाद है? व्हाट्सएप पर इस तरह की सूचनाएं चलनी शुरू हो गई है। समाज खास तौर पर मुस्लिम समाज को आपस मे बात करनी चाहिए और सबको समझना चाहिए कि अपना व्यवहार सुधरे ओर पूरे समाज को बदनाम न करे।

*मुसलमान अगर डॉक्टर है* तो गोरखपुर के *~कफील अहमद~* और लंका के *~अस्ब्दीन शफी~* की तरह आपको मारेगा.. *मरीज है* तो *~रफीक राशिद~* की तरह आपको मारेगा।

*मुसलमान आपका पड़ोसी या नज़दीकी* है तो *~जाहिद~* और *~असलम~* की तरह आपकी मासूम सी नन्हीं सी ढाई साल की बच्ची का बलात्कार करके वीभत्स हत्या करेगा और यदि आपकी बिटिया बड़ी हो चुकी है तो उससे छेड़खानी करेगा और *विरोध करने* पर _*ध्रुव त्यागी*_ की तरह आपको मारेगा। मुसलमान यदि गरीब है तो *~कसाब~* की तरह आतंक फैलायेगा और *अमीर है* तो कोलम्बो के चर्च की तरह आपको हूरों के पास ले जायेगा।

मुसलमान अनपढ़ हो या शिक्षित, गरीब हो या अमीर.. उसके लिये आप सिर्फ *काफिर* हैं और काफिर को मारना सबाब का काम है। अल्लाह को सबसे ज्यादा प्यारा *~जिहाद~* है – ऐसा _*उसकी क़ुरान कहती है।*_

अब आप चाहे जो भी कहें, वो कुरान की नाफरमानी तो कर नही सकता।

अब भी जाग जाओ और इनका बहिष्कार करो, नही तो इनका अगला शिकार आप ही बनोगे।

अगर मुस्लिम लोग जागने की जगह विक्टिम कार्ड खेलता रहेगा तो समाज मे वैमनस्य बढ़ेगा। पर शर्म की बात यह है कि जब विक्टिम मुसलमान होता है तो तो सब शोर मचाने लगते है पर जब आक्रांता मुस्लिम हो तो सब मुँह में फेवीकोल पी लेते है। यह सही नही है। यह ईमानदारी भी नही है।

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