भारत की जीडीपी वृद्धि दर को वास्‍तविकता से अधिक आंकने से जुड़े डॉ. अरविंद सुब्रमण्‍यन के लेख पर स्‍पष्‍टीकरण

भारत सरकार ने अरविंद सुब्रमण्यम के बयान को नकारते हुए यह स्पष्टीकरण दिया है:

भारत की जीडीपी वृद्धि दर को वास्‍तविकता से अधिक आंकने के संबंध में डॉ. अरविंद सुब्रमण्‍यन को उद्धृत करते हुए मीडिया के एक वर्ग में कुछ रिपोर्ट छपी हैं, जो एक अर्थमितीय मॉडल और संबंधित पूर्वानुमानों या पूर्वधारणाओं का उपयोग करते हुए बिजली की खपत, दुपहिया वाहनों की बिक्री एवं वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री जैसे संकेतकों के विश्‍लेषण पर आधारित है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्‍पाद) के संकलन में निहित जटिलताओं के बारे में विस्‍तार से बताने के लिए समय-समय पर विवरण जारी किए हैं। किसी भी अर्थव्‍यवस्‍था में जीडीपी का आकलन एक जटिल प्रक्रिया है जिसके तहत अनेक उपाय और मानदंड विकसित किए जाते हैं, ताकि अर्थव्‍यवस्‍था के प्रदर्शन को बेहतर ढंग से मापा जा सके। वैश्विक मानकीकरण के प्रयोजन के साथ-साथ तुलना किया जाना भी सुनिश्चित करने के लिए विभिन्‍न देश व्‍यापक सलाह-मशविरा के बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र में विकसित राष्‍ट्रीय लेखा प्रणाली को अपनाते हैं। राष्‍ट्रीय लेखा प्रणाली 2008 (एसएनए) वर्ष 2009 में संयुक्‍त राष्‍ट्र सांख्यिकी आयोग (यूएनएससी) द्वारा अनुमोदित राष्‍ट्रीय लेखा के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सांख्यिकीय मानक का नवीनतम प्रारूप है और यह पूर्ववर्ती ‘1993 एसएनए’ का एक अद्यतन प्रारूप है। राष्‍ट्रीय लेखा पर अंतर-सचिवालय कार्यदल को सदस्‍य देशों के साथ गहन परिचर्चाओं और सलाह-मशविरा के जरिए 2008 एसएनए को विकसित करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी। भारत ने सलाहकार विशेषज्ञ समूह की चर्चाओं में भी भाग लिया। यूएनएससी ने ‘2008 एसएनए’ को अपनाए जाने के दौरान अपनी सिफारिशों को लागू करने और उपलब्‍ध डेटा स्रोतों पर आधारित राष्‍ट्रीय लेखा सांख्यिकी की राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय रिपोर्टिंग हेतु इसका उपयोग करने के लिए सदस्‍य देशों, क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संगठनों को प्रोत्‍साहित किया।

जैसा कि किसी भी अंतर्राष्‍ट्रीय मानक के साथ होता है, डेटा संबंधी आवश्‍यकताएं अत्‍यंत ज्‍यादा हैं और भारत जैसी विभिन्‍न अर्थव्‍यवस्‍थाओं को प्रासंगिक डेटा स्रोतों को विकसित करने में समय लगता है और इसके बाद ही वे पूरी तरह से एसएनए संबंधी आवश्‍यकताओं के अनुरूप हो पाती हैं। डेटा के अभाव में वैकल्पिक परोक्षी (प्रॉक्‍सी) स्रोतों या सांख्यिकीय सर्वेक्षणों का उपयोग जीडीपी/जीवीए (सकल मूल्‍य वर्द्धित) में विभिन्‍न क्षेत्रों (सेक्‍टर) के योगदान का आकलन करने में किया जाता है। एसएनए में यह भी बताया जाता है कि अनुमानों के आधार वर्ष को समय-समय पर संशोधित किया जा सकता है, ताकि आर्थिक परिवेश में हुए परिवर्तनों, पद्धति संबंधी अनुसंधान में हुई प्रगति और उपयोगकर्ताओं (यूजर) की आवश्‍यकताओं को समुचित रूप से समाहित किया जा सके।

अर्थव्‍यवस्‍था में हो रहे ढांचागत बदलावों को ध्‍यान में रखते हुए विभिन्‍न वृहद आर्थिक संकेतकों जैसे कि सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी), औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी), उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) इत्‍यादि के आधार वर्ष को समय-समय पर संशोधित करना आवश्‍यक है, ताकि ये संकेतक प्रासंगिक बने रहें तथा ढांचागत बदलावों को और भी अधिक यथार्थपरक ढंग से परिलक्षित कर सकें। इस तरह के संशोधन न केवल जनगणनाओं एवं सर्वेक्षणों से प्राप्‍त नवीनतम आंकड़ों का उपयोग करते हैं, बल्कि उन प्रशासनिक आंकड़ों से जुड़ी सूचनाओं को भी समाहित करते हैं जो समय के साथ और ज्‍यादा सुदृढ़ हो गए हैं। भारत में जीडीपी सीरीज के आधार वर्ष को 2004-05 से संशोधित कर 2011-12 कर दिया गया था और एसएनए 2008 के अनुरूप विभिन्न स्रोतों एवं पद्धतियों को अपनाने के बाद 30 जनवरी, 2015 को इसे जारी किया गया था। वृहद आंकड़ों के संकलन की पद्धति पर ‘राष्‍ट्रीय लेखा सांख्यिकी पर सलाहकार समिति (एसीएनएएस)’ ने विस्‍तारपूर्वक विचार-विमर्श किया है जिसमें शैक्षणिक संस्‍थानों, राष्‍ट्रीय सांख्यिकी आयोग, भारतीय सांख्यिकी संस्‍थान (आईएसआई), भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त, कृषि एवं कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, नीति आयोग और चुनिंदा राज्‍य सरकारों के विशेषज्ञ शामिल हैं। उल्‍लेखनीय है कि आंकड़ों की उपलब्‍धता और पद्धति संबंधी पहलुओं को ध्‍यान में रखने के बाद ही इन समितियों द्वारा सर्वसम्‍मति एवं सामूहिक रूप से निर्णय लिए जाते हैं।

चूंकि आधार वर्ष में किसी भी संशोधन के परिणामस्‍वरूप नए और ज्‍यादा नियमित डेटा स्रोत उपलब्‍ध हो जाते हैं, इसलिए इस बात को ध्‍यान में रखना आवश्‍यक है कि पुरानी और नई सीरीज की तुलना सरल वृहद-अर्थमितीय प्रतिमानों या प्रतिरूपण के अनुरूप नहीं होती है। इसके साथ ही इसे भी ध्‍यान में रखा जाना चाहिए कि विभिन्‍न राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय एजेंसियों द्वारा प्रस्‍तुत किए गए जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान मोटे तौर पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय द्वारा जारी किए गए अनुमानों के अनुरूप ही हैं। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए जीडीपी अनुमान स्‍वीकृत प्रक्रियाओं, पद्धतियों एवं उपलब्‍ध डेटा पर आधारित हैं और ये निष्‍पक्षता के साथ अर्थव्‍यवस्‍था में विभिन्न सेक्‍टरों के योगदान को मापते हैं।

(साभार पी आई बी जून 11, 2019)

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