2019 चुनाव के आंकड़ों का विश्लेषण

जीतने वाली भाजपा:

303 सीटे जीत कर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बानी है। साथियों के साथ मिला ले तो 350 सीटों के साथ रालोग (NDA) सरकार बना रही है। कांग्रेस कुल 51 सीटे जीत कर प्रमुख विपक्षी पार्टी भी नही बन पाई है। प्रमुख विपक्ष के लिए 543 सीटों की लोक सभा में 55 सीटों की जरूरत थी।

राहुल गांधी अमेठी से 55000 से भी ज्यादा वोटों से स्मृति ईरानी से हार गए। वैसे 2014 के लोकसभा चुनावों में 27 महिला सांसदों सहित सिर्फ 197 मौजूदा सांसदों ने इस 2019 के आम चुनाव में अपनी सीट बरकरार रखने में कामयाबी हासिल की है। बाकी सब हार गए या चुनाव ही नही लड़े।

2019 में वोटों की संख्या:

बीजेपी – 22.6 करोड़ वोट
कांग्रेस – 11.86 करोड़ वोट

कांग्रेस से बीजेपी को दुगुने वोट मिले। 2014 में बीजेपी को 17 करोड़ वोट मिले थे। 2019 में बीजेपी के वोट बैंक में 2014 के मुकाबले साढ़े पांच करोड़ वोट का इजाफा हुआ, जबकि कांग्रेस के वोट बैंक में सिर्फ सवा करोड़ वोट ही बढ़े।

ज्ञात रहे इस साल कुम्भ में आने वालों की संख्या भी 23 करोड़ के आस पास थी।

50 प्रतिशत वोट की लड़ाई:

जिन राज्यों में भाजपा / एनडीए 50% या अधिक वोट है:

कर्नाटक (51%)
गोवा (51%)
महाराष्ट्र (51%)
गुजरात (62%)
मध्य प्रदेश (58%)
राजस्थान (59%)
छत्तीसगढ़ (51%)
झारखंड (55%)
हरियाणा (58%)
दिल्ली (57%)
हिमाचल (69%)
उत्तराखंड (61%)
यूपी (50%)
बिहार (53%)

जीत का अंतर:

लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से गुजरात की नवसारी सीट से भाजपा के सी.आर.पाटिल ने जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के पटेल धर्मेशभाई भीमभाई को 6,89,668 वोटों से हराया है। पाटिल को 9,69,430 वोट मिले हैं। वर्ष 2014 के मुकाबले पाटिल ने अपनी जीत के अंतर को और बेहतर किया है। पिछला लोकसभा चुनाव पाटिल ने 5,58,116 मतों के अंतर से जीता था।

दूसरे नम्बर पर हरियाणा के करनाल से भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया है जिन्होंने 9,09,432 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 6,56,142 वोटों के अंतर से हराया है।

तीसरे नम्बर पर हरियाणा के ही फरीदाबाद सीट से दोबारा चुनाव लड़ रहे कृष्ण पाल है जिन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार अवतार सिंह भड़ाना को 6,38,239 वोटों के अंतर से हराया है। कृष्ण पाल को 9,10,787 वोट मिले हैं।

2019 चुनाव भाजपा ने वोटों के भारी अंतर से विजय पाई है। भाजपा का जीतने का औसत अंतर इस प्रकार रहा:

राजस्थान: 3.38 लाख

उत्तर प्रदेश: 1.68 लाख

मध्यप्रदेश: 3.06 लाख

कर्नाटक: 1.73 लाख

हरियाणा: 3.59 लाख

महाराष्ट्र: 1.98 लाख

बिहार: 2.19 लाख

हारने वाले मंत्री:

जब चारों तरफ मोदी नाम का सुनामो चल रहा था और सब जीत रहे थे तो भी 5 मंत्री चुनाव हार गए। मोदी सरकार के हारने वाले पांच मंत्रियों के बारे में…

हंसराज गंगाराम अहिर: मोदी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को कांग्रेस के सुरेश नारायण धनोरकर ने चंद्रापुर महाराष्ट्र सीट से हराया है।

मनोज सिन्हा: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री को मनोज सिन्हा की हार ने सबको चौंका दिया है. मनोज सिन्हा को गाजीपुर उत्तर प्रदेश सीट से बसपा के अफजल अंसारी के हाथों हार मिली है।

पॉन राधाकृष्णन: तमिलनाडु की कन्याकुमारी सीट पर वित्त राज्य मंत्री पॉन राधाकृष्णन को कांग्रेस नेता एच वसंत कुमार ने हराया।

केजे अल्फोन्स- केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस भी अपनी सीट नहीं बचा पाए. केरल में कांग्रेस नेता हिबी हिडेन केजे अल्फोन्स को हराया है।

हरदीप पुरी: अमृतसर पंजाब सीट से कांग्रेस के गुरजीत सिंह आहुजा ने हराया है।

कांग्रेस के पास अंडा ही अंडा:

कांग्रेस के लोक सभा मे नेता मल्लिकार्जुन खरगे भी गुलबर्गा कर्नाटक से चुनाव हार गए है। कांग्रेस की सफाई ऐसी हुई है की राहुल गांधी सोच रहे है की इन अंडों को कैसे खाऊ:

दिल्ली- 🥚
गुजरात- 🥚
आंध्र – 🥚
राजस्थान- 🥚
हरियाणा – 🥚
हिमाचल – 🥚
उत्तराखंड – 🥚
अरुणाचल – 🥚
ओडिशा – 🥚
त्रिपुरा – 🥚
मणिपुर – 🥚
मिजोरम – 🥚
दमन दीव – 🥚
दादरा नगर हवेली – 🥚
अंडमान- 🥚
चंडीगढ़- 🥚

51 सीटों के साथ राहुल गांधी अब प्रमुख विपक्षी पार्टी नही बन सकते। कुल मिला कर जितनी सीट कांग्रेस की पूरे देश मे आई है इससे ज्यादा भाजपा की उत्तर प्रदेश में है।

सितारों की बात:

चुनाव हो और बड़े सितारे न उतरे, ऐसा कैसे हो सकता है। इस चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ। लेकिन कुछ सितारों की स्टारडम काम पैड गई:

सनी देओल जीते लेकिन उर्मिला मातोंडकर हार गईं।
हेमा मालिनी जीतीं लेकिन राज बब्बर हार गए।
गौतम गंभीर जीते लेकिन विजेंदर सिंह हार गए।

अगर आपका नेता नरेंद्र मोदी जैसा है तभी स्टारडम चमकता है।

इसी प्रकार एक सितारे ने जम कर प्रचार किया और बताया भी की कितनी नई साड़ियां खरीद कर प्रचार किया। इनका नाम है स्वरा भास्कर मुम्बई में हिंदी फिल्मों की एक अभिनेत्री है। स्वरा भास्कर ने प्रचार किया ओर नतीजा:

दिग्विजय सिंह 3,64,822 से हार गया
कन्हैया 4,22,217 से हार गया
अतिषी 4,76,828 से हार गए
राघव चड्ढा 3,67,043 हारे
दिलीप पांडे 5,96,943 से हार गए
अमरम 7,40,642 से हार गया

मतलब की गर्दिश की सितारों को पर्दे के सितारे नही उबर सकते।

ऐसा क्यों हुआ यह तो स्वरा जी जाने पर 17 वीं लोक सभा मे पहली बार 76 महिलाएं सांसद बन के आ रही है।

पत्रकार:

2014 में बहुत से पत्रकार राजनीति में कूदे। 2019 में पत्रकार सुप्रिया श्रुति ने राजनीति में कदम रखा। वह महाराजगंज से दो बार के कांग्रेस सांसद स्वर्गीय हर्षवर्धनऔर रक्षा मंत्रालय की रक्षा समिति के सदस्य की बेटी हैं। वह उत्तर प्रदेश की महाराजगंज सीट से चुनाव लड़ी पर हार गई।

ईवीएम से छेड़ छाड़:

542 सीटों पर चुनाव हुए। लगभग सभी सीटों पर नतीजे घोषित हो गए। सभी सीटों पर हर विधानसभा की 5 रैंडम VVPAT मशीन की पर्चियों के मिलान के आदेश के तहत 20 हज़ार से ज़्यादा VVPAT से पर्चियों का मिलान हुआ। एक भी मिलान गलत नहीं मिला। तो अब कोई नेता/पत्रकार EVM का रोना रोए तो उसको दूर से नमस्कार।

केरल अभी दूर है:

बहुत प्रयास के बाद भी भाजपा का केरल में खाता नही खुल पाया। पटानामथीटा जहां सबरीमाला के कारण कुछ आशा थी, सफल नही हो पाई और यह दशा रही:

दूसरी आशान्वित सीट तिरुवनंतपुरम पर शशि थरूर 4,16,131 मतो से 41.2% वोट पा कर जीत गए। भाजपा के कुमानन राजशेखरन दूसरे स्थान पर 3,16,142 मतों से 31.3% मत ही प्राप्त कर सके।

इस प्रकार यह चुनाव रोचक आंकड़ो के साथ संपन्न हुआ।

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